टालमटोल (procrastination) वो शब्द है जो मनोविज्ञान में इस तरह आया: अभी कुछ करने की इच्छा न होना और ज़रूरी काम बाद के लिए टालना। मैंने टालमटोल पर कोई खास किताब नहीं पढ़ी थी तो मैंने खुद खोजा और काम टालने की वजहों को थोड़ा समझा। मुख्य वजहें:
1) प्रेरणा की कमी और लंबे समय तक डूबने-केंद्रित रहने की अनिच्छा।
2) इनपुट जानकारी की कमी।
3) बड़ी ज़िम्मेदारी, संभावित जोखिम और नाकामी का डर।
4) परफेक्शनिज़्म।
मैं खुद हर बिंदु पर टालमटोल से टकराया हूँ। सबसे समस्या वाला शायद प्रेरणा की कमी से ज़्यादा इनपुट जानकारी की कमी है — क्या करना है पूरी तरह साफ नहीं। खासकर काम पर अक्सर होता है जहाँ हुक्म ऊपर से आते हैं और हमेशा खुद जानकारी जुटाने की गुंजाइश नहीं। नतीजा ये कि हाथ में पूरी जानकारी नहीं या काम के लिए औज़ार नहीं, तो उस पर हाथ ही नहीं लगाते। और अगर इस बिंदु पर बहाना चल सकता है तो बाकी पर मुश्किल। बाकी वजहों से तो साफ लड़ना होगा। परफेक्शनिज़्म बुराई है, उस पर नीचे अलग अध्याय लिखूंगा। बड़ी ज़िम्मेदारी और संभावित जोखिम सिर्फ आपके डर से जुड़े हैं, जिनसे इस हालत में लड़ना ही होगा। वहीं प्रेरणा की कमी और लंबे समय तक डूबने की अनिच्छा मेरे ख्याल से ज़्यादातर लोगों में सबसे आम समस्या। मेरे दोस्तों और जानकारों में ऐसे साफ मामले हैं जो लंबे समय केंद्रित नहीं रह पाते। और पता हैं वो कौन? नाकाम और निकम्मे। मैं ये नापसंदगी से नहीं कहता। नहीं, अच्छे लोग। बात ये कि तीस तक उन्होंने अपना कुछ नहीं बनाया। उनके पास कुछ नहीं — न सिर में न जेब में।
टालमटोल के आगे झुक जाना सबसे बुरा है जो आपके साथ हो सकता है। आप हफ्तों, महीनों या सालों तक सच में ज़रूरी और ज़रूरी काम पर हाथ नहीं लगा सकते, बहाने बनाते और किसी और चीज़ में लग जाते जो अभी बिल्कुल मायने नहीं रखती। इससे लड़ना होगा और खुद में वो प्रेरणा ढूंढनी होगी कि उन मुश्किल कामों में लंबे समय तक डूबे रहो। तारीफ वाली विधि, सार्वजनिक वादे या कोई और तरीका इस्तेमाल करो जो तुम्हें मदद करे या नापसंद कामों और लक्ष्यों पर केंद्रित रहने को मजबूर करे। ऐसे कामों में लंबे समय तक डूबे रहना और लगातार उन पर काम करना ज़रूरी। इसे फ्लो स्टेट कहो या बस केंद्रित काम — फर्क नहीं। मुख्य बात ये कि तुम वो नापसंद काम करो।